वारंगल के राजू Hi-Partner पर इलेक्ट्रीशियन बनकर महीने के ₹40,000 कैसे कमाते हैं
दो साल पहले राजू लेबर अड्डे पर उस काम का इंतज़ार करते थे जो हफ़्ते में तीन दिन मिलता था। आज उनका कैलेंडर फ़ोन से भरता है। उन्होंने यह कैसे किया — और नए कामगारों से क्या कहते हैं।

राजू कुमार, 31, ने हनमकोंडा में अपने चाचा से बिजली का काम सीखा। आठ साल तक उनकी कमाई इस पर टिकी रही कि सुबह लेबर स्टैंड पर कौन मिला और किस ठेकेदार को उनका नंबर याद रहा। अच्छे हफ़्ते ₹18,000 देते थे; बुरे महीने उससे कहीं कम।
2025 की शुरुआत में एक ग्राहक ने उन्हें Hi-Partner ऐप दिखाया और उसी शाम उन्होंने रजिस्टर कर लिया। "मेरे पास न फ़ोटो थे, न रिव्यू। मैंने बस अपने हुनर और रेट लिखे और रेडियस 12 किमी रखा," वे कहते हैं।
पहला महीना
पहली बुकिंग चार दिन बाद आई — काज़ीपेट में एक सीलिंग फैन। राजू ने जल्दी काम ख़त्म किया, ग्राहक से ऐप में रेटिंग देने को कहा और काम की एक फ़ोटो पोस्ट की। महीने के अंत तक नौ काम पूरे और 4.9 रेटिंग। "ग्राहक देख सकते हैं कि मैं सत्यापित हूँ और पास में असली काम कर चुका हूँ। इससे बातचीत बदल जाती है।"
महीने के ₹40,000 कैसे बनते हैं
राजू अब महीने में 22 से 26 काम लेते हैं: ₹400 की हाउस कॉल, ₹1,200 के पूरे दिन और कभी-कभार ₹6,000 की रीवायरिंग। कमीशन न होने से स्क्रीन पर दिखी रकम ही हाथ में आती है। रविवार खाली रखते हैं और हफ़्ते के दिनों की सुबह अवेलेबिलिटी पल्स चालू रखते हैं ताकि आस-पास के ग्राहकों को वे "अभी उपलब्ध" दिखें।
- हर बुकिंग अनुरोध का दस मिनट में जवाब दें, भले ही मना करना हो।
- हर काम की एक फ़ोटो पोस्ट करें — ग्राहक बुक करने से पहले गैलरी देखते हैं।
- रेट ईमानदार और स्थिर रखें; ग्राहक याद रखी कीमत के लिए लौटते हैं।
- पल्स तभी चालू करें जब आप सच में एक घंटे में निकल सकें।
नए कामगारों के लिए उनकी सलाह
"परफ़ेक्ट प्रोफ़ाइल का इंतज़ार मत करो। रजिस्टर करो, पहला छोटा काम लो, अच्छे से करो और रेटिंग माँगो। बाक़ी सब अपने आप आता है।" राजू अब तक अपनी कॉलोनी से ग्यारह कामगारों को रेफ़र कर चुके हैं; उनमें से चार अब ट्रस्टेड टियर में हैं।

